CAA full form in Hindi: जाने CAA,CAB,NRC के बारे मे

CAA full form in Hindi and English

CAA का फूल फॉर्म Citizen Amendment Act होता है तथा CAA full form in Hindi  नागरिक संशोधन कानून होता है।

CAB full form in Hindi and English

CAB का फूल फॉर्म ‘Citizen Amendment Act’ होता है तथा CAB फूल फॉर्म इन हिन्दी मे ‘नागरिक संशोधन विधेयक’ होता है।

जबसे CAB को संसद मे पेश किया गया था तबसे आज तक बहुत चर्चा मे रहा। इस कानून के खिलाफ बड़ा आंदोलन भी हुआ और भारत तथा विदेशी मीडिया ने यह न्यूज को बहुत बड़े पयमाने पर फैलाया भी था।

cab चर्चा मे क्यू है ?

तो इस पोस्ट मे हम CAA का full form, CAA क्या है?, CAA और CAB मे अंतर क्या है? CAA क्यू लाया गया था?, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, केंद्र सरकार का पक्ष आदि की विस्तार से चर्चा करेंगे तो आप इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढे ताकि आपका सभी समस्या का हाल हो जाए।

नागरिकता संशोधन कानून(CAA) क्या है?

नागरिक संशोधन कानून के मुजब 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों को यानी की हिन्दू, पारसी, जैन, शिख, बौद्ध, ईसाई धर्म के लोग को गैरकानूनी प्रवासी माना नहीं जाएगा। लेकिन याद रहे की इसमे मुस्लिम धर्म के लोगों को सामील नहीं किया गया है ।

CAA kya hai

Citizen Amendment Act,1955 तहत गेरकानूनी यात्रीओ को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित करता है। इस अधिनियम के तहत गेरकानूनी यात्रीओ को ऐसे व्यक्ति को नीचे मुजब रूप में परिभाषित किया गया है।

  1. जो भी व्यक्ति अपने निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक भारत में रह रहा हो। या
  2. जो भी व्यक्ति ने मान्य पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ों के बिना भारत देश मे आया हो।

CAB और CAA मे क्या अंतर है?

हम मे से बहुत कुछ लोगों को CAB और CAA मे confusion रहता है, की किसे CAA और किसे CAB कहते है तो चलिए इस समस्या को हल करते है….

CAB और CAA

भारत की संसद के निचले गृह यानी की लोकसभा मे यह विधेयक पेश किया गया था तब इसका नाम CAB यानी की Citizen Amendment Bill था।

लेकिन जब जनवरी मे हमारे माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर किया है तबसे इस का नाम CAA यानी की Citizenship Amendment Act हो गया।

CAA full form in Hindi यानी की उसका पूर्ण नाम नागरिकता संशोधन कानून हो गया। इसमे bill की जगह नाम बदलकर act कर दिया। Bill को हिंदी में ‘विधेयक’ कहा जाता है और ACT को हिन्दी मे ‘अधिनियम’ कहा जाता है।

किस कानून के संशोधन तहत CAA बना?

हमारे संविधान के भाग-2 मे अनुच्छेद(article) 5 से 11 तहत नागरिकता के बारेमे बात की गई है।

लेकिन भारतीय संविधान मे नागरिकता सबंधी विस्तार से लिखा गया नहीं था इसलिए भारतीय संसद ने नागरिकता सबंधी 1955 मे भारतीय नागरिकता अधिनियम लाया गया था।

भारतीय संसद को अनुच्छेद 11 के प्रावधान तहत नागरिकता कानून को बनाने का अधिकार मिलता है यानी की संसद किसी को भी नागरिकता देने या खत्म करने संबंधी कानून बनाने का अधिकार मिला है।

संसद ने इसी अधिनियम का संशोधन 1986,1992,2003,2005,2015 और 2019 यानी की कुल 6 बार किया है।

हमने CAA फूल फॉर्म इन हिन्दी से नागरिकता अधिनियम समजा तो अब समजते है 1955 के नागरिकता अधिनियम के लिए जरूरी योग्यता…..

1955 के नागरिकता अधिनियम के लिए जरूरी योग्यता

  • नागरिकता अधिनियम, 1955 अंदर प्रावधान के मुजब कुछ योग्यता को पूरा करने वाले व्यक्ति (गेरकानूनी प्रवासियों के अतिरिक्त) को नागरिकता प्राप्ति के लिये आवेदन करने की अनुमति प्रदान करता है तो अधिनियम के अनुसार, इसके लिये अन्य बातों के अलावा उन्हें आवेदन की तिथि से 12 महीने पहले तक भारत में निवास और 12 महीने से पहले 14 वर्षों में से 11 वर्ष भारत में बिताने की शर्त पूरी करनी होगी।
  • हालाकी इस विधेयक अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों यात्री के लिये 11 वर्ष की शर्त को घटाकर 5 वर्ष कर दिया है।
  • नागरिकता प्राप्त करने पर ऐसे व्यक्तियों को भारत में उनके प्रवेश की तारीख से भारत का नागरिक मान लिया जाएगा तथा गेरकानूनी यात्री या नागरिकता के संबंध जिस भी कानूनी कार्यवाही चलती थी वह सभी माफ कर दी जाएगी।

लेकिन इस अधिनियम से मिलने वाली नागरिकता :

भारत के संविधान अंतर्गत 5 प्रकार से नागरिकता मिलती है लेकिन इस अधिनियम मे मात्र पंजीकरण या देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त हो सकती है।

CAA मुजब नागरिकता लेने के लिए जरूरी योग्यता

  1. व्यक्ति एक वर्ष पहले से भारत में रह रहा हो या उसके माता या पिता में से कोई एक भारत के नागरिक हो, तो वह पंजीकरण करने के बाद भारतीय नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर सकेगा।
  2. स्वाभाविक रूप से जिस भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की योग्यता में से एक यह है कि आवेदनकर्ता आवेदन करने से पहले एक निश्चित समयावधि से भारत में स्थायी हो या केंद्र सरकार में किसी भी प्रकार की नौकरी कर रहा हो और उसने कम-से-कम 11 वर्ष का समय उसने भारत में बिताया होना चाहिए।
  3. यह योग्यता के अनुरूप विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदु, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों एवं ईसाइयों के लिये एक प्रावधान किया गया है। व्यक्तियों के इन समूहों के लिये 11 साल की अवधि को कम करके 5 साल कर दिया है।

नागरिकता मिलने पर:

  • ऐसे लोगों को भारत में उनके प्रवेश की तारीख से भारत का नागरिक मान लिया जाएगा
  • उनके खिलाफ गेरकानूनी यात्री या नागरिकता के संबंध में जो भी कानूनी कार्यवाही का नहीं की जाएगी या बंध कर दी जाएगी।

क्यू इस कानून का विरोध हो रहा है?

caa protest

भारत सरकार के तरफ से यह कहना है कि यह कानून तहत किसी की भी नागरिकता को समाप्त नहीं करता है लेकिन बांग्लादेश पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों यानी की हिन्दू, सिख, इसी , जैन, बुद्ध, ईसाई को नागरिकता मिलेगी।

जबकि विपक्षी दल मानते हैं कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15 का सरेआम उल्लंघन करता है और भारत के मुसलमानों को लगता है कि इस बिल के जरिए उसकी नागरिकता समाप्त हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है।

किस राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटये थे ?

भारत के सभी विपक्षी दल इस कानून का विरोध कर रहे है। इसमे से केरल राज्य की सरकार ने सौप्रथम विरोध किया था।

केरल के मुख्य प्रधान श्री पी.विजयनने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत माननीय उच्चतम न्यायालय(Supreme Court) मे याचिका दखल करवाई थी। श्री विजयन के मुताबीत अनुच्छेद 14,21 और 25 का इस कानून मे उल्लंघन हो रहा है और धर्मनिरपेक्ष और बुनियादी सिद्धांत का भी हनन हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट

कई लोगों ने उच्चतम न्यायालय मे CAB पर रोक लगाने पर याचिका दाखल की थी। लेकिन इस पर SC का अंतिम फैसला आना बाकी है।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने स्पष्ट शब्दों मे कहा की पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश इस्लामिक गणराज्य हैं जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक हैं इसलिये उन्हें उत्पीड़ित अल्पसंख्यक नहीं माना गया है।

इस विधेयक का उद्देश्य किसी की नागरिकता लेने के बजाय उन्हें सहायता देना है ऐसा सरकार का मानना है।

यह विधेयक उन सभी लोगों के लिये एक वरदान के रूप में है, जो विभाजन के समय मे शिकार हुए थे और अब ये तीन देश लोकतांत्रिक इस्लामी गणराज्यों में परिवर्तित हो गए हैं।

केंद्रसरकार के मुताबीत इस विधेयक को लाने के कारणो के रूप में पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा करने में धार्मिक विभाजन तथा बाद में नेहरू-लियाकत संधि की 1950 की विफलता पर भारत के विभाजन का हवाला दिया है।

केंद्र सरकार के इस रुख से हम कह सकते है की वह विदेशी अल्प संख्यक लोगों के लिए यह कानून लाना चाहता है।

NRC का CAA साथ सबंध

गृहमंत्री श्री अमित शाह ने जनवरी,2020 मे कहा की अभी NRC लागु करने की कोई योजना नहीं है तथा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने मन की बात कार्यक्रम मे कहा की अभी NRC लाने की कोई योजना नहीं है।

अब हम NRC के बारे मे जानते है ….

NRC का full form

NRC का फूल फॉर्म National Register of Citizens होता हैऔर इसका हिन्दी मे पूर्ण नाम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर है।

NRC एक रजिस्टर ही है जिसमे सभी ही भारत के लोगों का विवरण शामिल किया गया है। इस रजिस्टर को 1951 की राष्ट्रीय जनगणना के पश्चात मे लाया गया था। 1951 की जनगणना मे गणना किये गए सभी व्यक्तियों के विवरण शामिल किए गए थे।

लेकिन इसके बाद केवल असम राज्य मे ही इसे दुबारा अपडेट किया गया था और 31 अगस्त, 2019 को इसका अंतिम कार्य पूर्ण हुआ था। जिसमे NRC की अंतिम सूची मे 19,06,657 लोगो को संदिग्ध पाया गया था। आपको ज्ञात कर दु की यह सूची मे हिंदू एवं मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोग के नाम शामील हुए थे।

असम का NRC और CAA बिचका विवाद

NRC असम और CAA बीचमे मे विवाद का कारण यह है की CAA लागु हो जाने के बाद असम के गैर-मुस्लिमों धर्म के लोगों को नागरिकता प्राप्त करने का अवसर मिल जाएगा। रह गई मुस्लिम लोगों की तो उन्हे CAA के तहत गैरकानूनी प्रवासी माना जाएगा और उन्हे नागरिकता नहीं मिल पाएगी। इसलिए बड़े पेमाने पर आसामी लोगों विरोध कर रहे है।

वर्ष 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान का बांग्लादेश) के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की हिंसक कार्यवाई शुरू हुई तो वहाँ के लगभग 10 लाख लोगों ने असम मे आए थे। हालाँकि बांग्लादेश बनने के बाद इनमें से अधिकांश वापस लौट गए, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में बांग्लादेशी असम में ही गेरकानूनी रूपसे रहने लगे थे।

असम समझौते (Assam Accord)

इसके बाद 1985 मे केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच समझौता हुआ जिसे असम समझौते (Assam Accord) नाम से पहचाना गया था।

इसी तरह 25 मार्च, 1971 के बाद असम में आए सभी बांग्लादेशी नागरिकों को यहाँ से जाना होगा, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान। इस तरह यह समझौता गेरकानूनी यात्री के बीच धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं करता है।

असम में CAA को लेकर विरोध की एक बड़ी वजह यही है कि हालिया नागरिक संशोधन विधेयक असम समझौते का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसके तहत उन लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी जो 1971 एवं 2014 से पहले भारत लौट आ गए है।

आपको बता दे की NRC असम राज्य मे लागू कीया गया था। 31 अगस्त,2019 मे तकरीबन 19 लाख लोगो को संदिग्ध पाया गया था।

CAA का अंतिम निष्कर्ष

लोकसभा मे जबसे यह विधेयक लाया गया था तबसे अब तक यह कानून बहुत ही विवाद मे रहा है। लेकिन हमे माननीय सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय आने तक इंतजार करना होगा तथा SC पर पूर्ण विश्वास रखना होगा।

भारत की आजादी के बाद मुस्लिम राष्ट्रों मे देखे तो अल्पसंख्यकों की संख्या मे भारी गिरावट आई है तो इन्हे भारत की नागरिकता मिलनी चाहिए लेकिन भारत के संविधान अंतर्गत किसी भी एक धर्म के खिलाफ ऐसा कानून नहीं बनाना चाहिए। देखते है माननीय उच्चतम न्यायालय का क्या फैसला आता है?

हमने CAA फूल फॉर्म इन हिन्दी और CAB का फूल फॉर्म को समज लिया लेकिन वर्ल्ड वाइड CAA के फूल फॉर्म देखते है।

CAA full formcategory
Civil Aviation AuthorityAcademic & Science
Clean Air ActGovernmental
Creative Artists AgencyCompanies & Firms
Canadian Automobile AssociationCompanies & Firms
California Alumni AssociationAcademic & Science
Computer Assisted AssessmentComputing
Computer-Aided AssessmentGeneral Computing
Creative Artist AgencyCompanies & Firms
Concepts Analysis AgencyMilitary
Connecticut Archery AssociationGeneral Computing
Codesys Automation AllianceAlliances
Combined Arms AgencyMilitary
Category Agreement AnalysisUnclassified
Carrollton Athletic AssociationAthletics
Calling All AngelsUnclassified
Case Alumni AssociationAcademic & Science
Crusade Against AbortionUnclassified
Chronic Aplastic AnaemiaBritish Medicine
Carotid Arterial AtherosclerosisBritish Medicine
Cancer Arthritis ArteryCancer

Frequently Asked Questions

  1. नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 लोकसभा मे पसार होने वाला कौनस संशोधन विधेयक है ? कब लागु हुआ ?

    (CAA) नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 लोकसभा मे पसार होने वाला 126 संशोधन विधेयक है
    नागरिकता संशोधन विधेयक 10 जनवरी, 2020 से लागु हुआ।

  2. What is the full form of CAA in Hindi and English?

    CAA का फूल फॉर्म Citizen Amendment Act होता है तथा CAA फूल फॉर्म इन हिन्दी मे नागरिक संशोधन कानून होता है।

  3. भारत मे किस तरह की नागरिकता का प्रावधान है?

    भारत मे ‘एकल’ नागरिकता का प्रावधान है। यानी की केंद्र की ही नागरिकता होती है । किसी भी राज्य की अलग से नागरिकता नहीं होती।

  4. किस अनुच्छेद मे विधि के समक्ष समानता का अधिकार का वर्णन है ?

    अनुच्छेद 14 मे विधि के समक्ष समानता का अधिकार का वर्णन है।

  5. भारत मे किस तरह से नागरिकता मिलती है?

    भारत मे कुल 5 तरह से नागरिकता मिल सकती है।
    जन्म के द्वारा
    वंशानुक्रम के आधार तह
    देशीकरण द्वारा
    पंजीकरण द्वारा
    क्षेत्र समविष्टि

इस पोस्ट मे हमने CAA full form in Hindi and English , CAB full form , नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है?, CAB और CAA मे क्या अंतर है?, किस कानून के संशोधन तहत CAA बना?, क्यू इस कानून का विरोध हो रहा है?, NRC का CAA साथ सबंध सिखा ।

मै आशा रखता हु की आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा और आपके ज्ञान बढ़ा होगा।

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